विस्तृत उत्तर
ब्रह्मास्त्र एक मांत्रिक दिव्यास्त्र था जिसे चलाने के लिए मन की शक्ति, मंत्र-ज्ञान और असाधारण आध्यात्मिक बल की आवश्यकता होती थी।
चलाने की विधि इस प्रकार थी — योद्धा को पहले भगवान ब्रह्मा का ध्यान और आह्वान करना होता था। फिर विशेष मंत्र का उच्चारण करते हुए धनुष पर बाण (जो साधारण बाण भी हो सकता था) चढ़ाया जाता था। उस बाण को मंत्रबल से अभिमंत्रित किया जाता था। बाण छोड़ते समय ब्रह्मास्त्र का बीज मंत्र उच्चारित करना होता था जिससे उसमें ब्रह्मास्त्र की शक्ति आती थी।
यह अस्त्र जिस पर भी चलाया जाता था उसका नाश अवश्यंभावी था। इसे चलाने का ज्ञान अत्यंत दुर्लभ था — केवल वे योद्धा इसे चला सकते थे जिन्हें किसी महान गुरु ने विधिपूर्वक दिया हो। पुराणों में कहा गया है कि इसे चलाने के लिए शारीरिक बल नहीं बल्कि मन और आत्मा की शक्ति चाहिए थी — इसीलिए इसे मांत्रिक अस्त्र कहते हैं।
चलाने के बाद यदि योद्धा चाहे तो इसे वापस बुला सकता था — परंतु इसके लिए भी उसे संपूर्ण ज्ञान होना आवश्यक था।





