विस्तृत उत्तर
द्रोणाचार्य ने अर्जुन को ब्रह्मास्त्र इसलिए दिया क्योंकि अर्जुन उनके सर्वश्रेष्ठ और सर्वाधिक प्रिय शिष्य थे — और द्रोण ने उनसे वचन दिया था कि कोई भी अर्जुन से बड़ा धनुर्धर नहीं होगा।
पौराणिक कथा के अनुसार द्रोणाचार्य ने ब्रह्मास्त्र स्वयं परशुराम (राम जामदग्न्य) से प्राप्त किया था। यह अस्त्र अत्यंत दुर्लभ और विनाशकारी था — इसे देने से पहले गुरु बहुत सोचते थे।
द्रोण ने अर्जुन को इसलिए दिया क्योंकि — पहले, अर्जुन उनके शिष्यों में सर्वाधिक समर्पित, अनुशासित और प्रतिभाशाली थे। दूसरे, द्रोण का वचन था कि अर्जुन से श्रेष्ठ धनुर्धर कोई नहीं होगा — उस वचन को पूर्ण करने के लिए यह जरूरी था कि अर्जुन के पास सर्वोच्च अस्त्र हो। तीसरे, भविष्य में धर्म की रक्षा के लिए अर्जुन को यह अस्त्र चाहिए था। द्रोण जानते थे कि महाभारत युद्ध होगा।
ब्रह्मास्त्र देते समय द्रोण ने शर्त रखी कि इसका प्रयोग कभी मनुष्यों पर नहीं करेंगे। महाभारत में अश्वत्थामा के विरुद्ध यह अस्त्र प्रयुक्त हुआ और ऋषियों के आग्रह पर अर्जुन ने इसे वापस ले लिया।





