विस्तृत उत्तर
महाभारत युद्ध के एक अत्यंत मार्मिक प्रसंग में जब भीष्म पितामह बाणों की शय्या पर लेटे हुए असहनीय पीड़ा में थे तब उन्होंने जल की इच्छा प्रकट की। अनेक योद्धाओं ने उन्हें विभिन्न प्रकार के पेय पदार्थ प्रस्तुत किए परंतु भीष्म ने उन्हें अस्वीकार कर दिया और अर्जुन की ओर देखा। अर्जुन अपने पितामह की इच्छा को समझते हुए आगे बढ़े और उन्होंने पर्जन्यास्त्र के 'सूक्ष्म रूप' का आह्वान किया। इस अस्त्र के प्रभाव से उन्होंने पृथ्वी से गंगाजल की एक निर्मल धारा उत्पन्न की, जो सीधे भीष्म पितामह के मुख में गई और उन्होंने तृप्त होकर अर्जुन को आशीर्वाद दिया।
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