का सरल उत्तर
अर्जुन ने पर्जन्यास्त्र के सूक्ष्म रूप का आह्वान करके पृथ्वी से गंगाजल की निर्मल धारा उत्पन्न की जो सीधे शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह के मुख में गई।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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