विस्तृत उत्तर
महाभारत में ऐंद्रास्त्र (इन्द्रास्त्र) के कई प्रयोग वर्णित हैं।
अर्जुन द्वारा 14वें दिन — महाभारत के युद्ध के 14वें दिन अर्जुन ने सुदक्षिण के विरुद्ध ऐंद्रास्त्र का प्रयोग किया था।
अर्जुन द्वारा 17वें दिन — 17वें दिन के युद्ध में संसप्तकों (वे योद्धा जिन्होंने जीतने या मरने की शपथ ली थी) का अंत करने के लिए भी अर्जुन ने इन्द्रास्त्र का प्रयोग किया।
रामायण में भी — रामायण में लंका-युद्ध के दौरान भी ऐंद्रास्त्र का उल्लेख मिलता है। दिव्यास्त्रों की परंपरा में इसे प्रमुख स्थान प्राप्त है।
वासवी शक्ति से भेद — वासवी शक्ति (जो कर्ण के पास थी) इंद्र का ही विशेष अस्त्र था परंतु वह केवल एक बार प्रयोग होता था। ऐंद्रास्त्र को बार-बार प्रयोग किया जा सकता था — यह दोनों में मुख्य अंतर है।





