विस्तृत उत्तर
अर्जुन और मेघनाद के अंतर्धान अस्त्र प्रयोग में धर्म और अधर्म का मौलिक अंतर था। अर्जुन का उपयोग अहिंसक और प्रदर्शनात्मक था — उन्होंने हस्तिनापुर की रंगसभा में बिना किसी को नुकसान पहुँचाए अपनी शक्ति को स्थापित किया। उनके पास अनदेखे में प्रहार करने की शक्ति थी लेकिन उन्होंने इसका उपयोग केवल कौशल प्रकट करने के लिए किया। इसके विपरीत मेघनाद का प्रयोग क्रूर, सामरिक और भयावह था। उसने अदृश्यता को भय और अराजकता पैदा करने के लिए हथियार बनाया। यह अस्त्र स्वयं में तटस्थ था; इसका स्वभाव पूरी तरह इसके चलाने वाले के चरित्र और इरादे से परिभाषित होता था।
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