विस्तृत उत्तर
महाभारत के आदि पर्व में हस्तिनापुर की रंगभूमि में जब कौरव और पांडव राजकुमार गुरु द्रोणाचार्य से प्राप्त अपनी अस्त्र-शस्त्र विद्या का प्रदर्शन कर रहे थे, तब अर्जुन ने अपने असाधारण कौशल से सभी को चकित कर दिया था। इसी प्रदर्शन के दौरान अर्जुन ने अन्य दिव्यास्त्रों के साथ-साथ पर्जन्यास्त्र का भी सफलतापूर्वक प्रयोग किया था। उन्होंने इस अस्त्र के आह्वान से आकाश में बादल उत्पन्न करके अपनी अद्भुत क्षमता का परिचय दिया था।
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