विस्तृत उत्तर
जब भगदत्त ने अर्जुन पर वैष्णवास्त्र चलाया और अर्जुन को इस अस्त्र का प्रतिकार ज्ञात नहीं था, उस संकटपूर्ण क्षण में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन की रक्षा के लिए उस अस्त्र को स्वयं अपनी छाती पर ले लिया। यह प्रसंग श्री कृष्ण की भगवत्ता और अर्जुन के प्रति उनकी असीम कृपा को दर्शाता है। श्री कृष्ण स्वयं विष्णु के अवतार थे इसलिए वे ही इस अस्त्र को अपने ऊपर ले सकते थे। यह वैष्णवास्त्र के केवल विष्णु द्वारा ही निष्क्रिय किए जा सकने की भी पुष्टि करता है।
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