📖
विस्तृत उत्तर
कृष्ण ने स्वयं सात्यकि के समक्ष यह स्वीकार किया कि वे अपनी दिव्य शक्ति का उपयोग करके कर्ण के मन को 'मोहित' या भ्रमित किए रहते थे। इसका उद्देश्य यह था कि अवसर आने पर भी कर्ण अर्जुन पर वासवी शक्ति का प्रयोग करने के बारे में न सोच पाए। यह केवल भौतिक बचाव नहीं था, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक युद्ध था जिसमें कृष्ण यह सुनिश्चित कर रहे थे कि कर्ण का सबसे शक्तिशाली हथियार पांडवों के लिए सही समय आने तक निष्क्रिय रहे।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?