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विस्तृत उत्तर
सूर्य देव जो इंद्र की इस योजना से अवगत थे, कर्ण के स्वप्न में प्रकट हुए और उसे इस छल के प्रति सचेत किया। उन्होंने कर्ण से आग्रह किया कि वह किसी भी हाल में अपने कवच-कुंडल दान न करे। इसके अतिरिक्त सूर्य देव ने कर्ण को यह भी सलाह दी थी कि यदि ऐसी स्थिति आए तो वह बदले में एक अमोघ अस्त्र की मांग करे, ताकि यह दान एक व्यापार बन जाए और इंद्र की प्रतिष्ठा भी बची रहे।
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