विस्तृत उत्तर
अर्जुन ने जयद्रथ वध के लिए पाशुपतास्त्र का प्रयोग किया था — महाभारत के सबसे नाटकीय और भावपूर्ण प्रसंगों में से एक।
पृष्ठभूमि — 13वें दिन जयद्रथ ने चक्रव्यूह के द्वार पर पांडवों को रोककर केवल अभिमन्यु को प्रवेश करने दिया था। अभिमन्यु की छल से हत्या होने पर अर्जुन ने प्रतिज्ञा ली — 'सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध नहीं हुआ तो अग्नि समाधि ले लूँगा।'
14वें दिन — पूरे दिन जयद्रथ को छिपाकर रखा गया। जब श्रीकृष्ण ने अपनी माया से नकली सूर्यास्त किया, जयद्रथ प्रसन्न होकर बाहर आ गया। तब कृष्ण ने सूर्य को पुनः प्रकट किया और तुरंत अर्जुन ने गांडीव पर पाशुपतास्त्र चढ़ाया।
विशेष पराक्रम — अर्जुन ने मंत्रोच्चार से पाशुपतास्त्र अभिमंत्रित किया और जयद्रथ पर छोड़ा। पाशुपतास्त्र ने जयद्रथ का सिर उसके पिता वृद्धक्षत्र की गोद में पहुँचा दिया।
जयद्रथ के पिता की शर्त — जयद्रथ के पिता को वरदान था कि जो उनके पुत्र का सिर जमीन पर गिराएगा उसका सिर भी फट जाएगा। पाशुपतास्त्र ने सिर को सीधे पिता की गोद में गिराया — पिता के उठने पर सिर जमीन पर गिरा और उनका सिर फट गया।





