विस्तृत उत्तर
पुराणों में तपस्या से दिव्यास्त्र प्राप्ति के अनेक उदाहरण मिलते हैं। प्रत्येक देवता की तपस्या से उनसे संबंधित अस्त्र मिलते थे।
शिव की तपस्या से — पाशुपतास्त्र: यह शिव जी का सर्वोच्च अस्त्र था। अर्जुन ने हिमालय में कठोर तपस्या की, किरात वेशधारी शिव से युद्ध कर परीक्षा दी और पाशुपतास्त्र प्राप्त किया। द्रोणाचार्य ने नारायण की उपासना से नारायणास्त्र प्राप्त किया।
विष्णु की उपासना से — नारायणास्त्र: महाभारत में द्रोण ने भगवान नारायण की उपासना करके यह अस्त्र प्राप्त किया और अश्वत्थामा को दिया।
इंद्र की कृपा से — अर्जुन स्वर्गलोक में एक वर्ष रहे और इंद्र से वज्रास्त्र, सम्मोहनास्त्र, इंद्रास्त्र सहित अनेक दिव्यास्त्र प्राप्त किए।
यम, वरुण, कुबेर से — अर्जुन को पाशुपतास्त्र प्राप्ति के समय ये देवता भी प्रकट हुए और उन्होंने अर्जुन को अपने-अपने अस्त्र दिए।
शर्त — तपस्या के लिए व्रत, उपवास, इंद्रिय-संयम, एकाग्रता और निर्मल आचरण आवश्यक था। तपस्या में अनेक परीक्षाएं आती थीं जिन्हें पार करना होता था।





