विस्तृत उत्तर
पिनाक शिव जी का सर्वाधिक प्रसिद्ध धनुष था जिसकी विशेषताएं अतुलनीय थीं।
निर्माण — पिनाक का निर्माण देवशिल्पी विश्वकर्मा ने किया था। एक कथा के अनुसार इसे ऋषि कण्व के शरीर पर उगे दिव्य बांस से बनाया गया था। इसे भगवान शिव को समर्पित किया गया और इस पर शिव जी का स्वामित्व था। यह पिनाक, शार्ङ्ग और गांडीव — इन तीनों महान धनुषों में से एक था।
शक्ति — पिनाक इतना भारी था कि धरती के किसी भी राजा, दैत्य, गंधर्व या यक्ष के लिए उसे उठाना असंभव था। इसकी मात्र टंकार से बादल फट जाते थे और पर्वत हिल जाते थे। इसी धनुष के एक ही बाण से भगवान शिव ने त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को एक साथ ध्वस्त किया था — जो इसकी अपार शक्ति का प्रमाण है।
महत्व — इस धनुष के बारे में यह भी कहा जाता है कि इसका संचालन केवल विशेष ज्ञानी और पात्र व्यक्ति ही कर सकते थे। इसे सुरक्षित रखना जनक के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी थी क्योंकि अगर यह रावण जैसे अहंकारी के हाथ लग जाता तो सृष्टि का विनाश हो सकता था।





