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त्रिपुरासुर प्रश्नोत्तरी — 19 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित त्रिपुरासुर विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 19 प्रश्न

शिव महिमा

रुद्राक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई, शिव पुराण के अनुसार?

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव ने दीर्घ तपस्या के बाद जब नेत्र खोले तो उनके नेत्रों से गिरे अश्रु-बिंदुओं से रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुए। 'रुद्र' (शिव) के 'अक्ष' (नेत्र) से उत्पन्न होने के कारण यह 'रुद्राक्ष' कहलाया और शिव का साक्षात स्वरूप माना गया।

रुद्राक्ष उत्पत्तिशिव पुराणशिव अश्रु
शिव रूप महिमा

शिव के त्रिपुरांतक रूप का वर्णन शिव पुराण में कैसे है

त्रिपुरांतक = तीन पुरों का अंत करने वाले। तीन असुर-पुत्रों के सोने-चाँदी-लोहे के तीन नगरों को शिव ने एक ही बाण से नष्ट किया। इसके बाद आनंद में शिव ने तांडव किया — यहीं से नृत्य का उद्भव माना जाता है।

त्रिपुरांतकत्रिपुरासुरएक बाण
अस्त्र शस्त्र

पिनाक धनुष की क्या खासियत थी?

पिनाक विश्वकर्मा निर्मित शिव का दिव्य धनुष था। इतना भारी कि कोई राजा उठा न सका। इसकी टंकार से पर्वत हिलते थे। इसी से शिव ने त्रिपुरासुर की तीनों नगरियाँ एक बाण से नष्ट की थीं।

पिनाक विशेषताशिव धनुषत्रिपुरासुर
शिव महिमा

त्रिपुरासुर कौन थे और उनकी उत्पत्ति कैसे हुई?

त्रिपुरासुर तारकासुर के तीन पुत्र थे — तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली। कार्तिकेय द्वारा तारकासुर के वध के बाद इन्होंने देवताओं से बदला लेने के लिए ब्रह्मा की कठोर तपस्या की और तीन आकाश-नगरों के स्वामी बनकर त्रिपुरासुर कहलाए।

त्रिपुरासुरतारकासुर पुत्रतारकाक्ष
दिव्यास्त्र

त्रिपुरासुर कौन था और उसका वध कैसे हुआ?

त्रिपुरासुर के तीन उड़ते हुए अजेय नगर थे जिन्हें शिव ने पाशुपतास्त्र से एक ही बाण में नष्ट किया। यह इस अस्त्र का सबसे प्राचीन ज्ञात प्रयोग है।

त्रिपुरासुरपाशुपतास्त्रशिव
दिव्यास्त्र

भगवान शिव ने पाशुपतास्त्र से क्या किया?

भगवान शिव ने पाशुपतास्त्र से त्रिपुरासुर का संहार किया और युगांत में सृष्टि का प्रलय करके नए सृजन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

शिवपाशुपतास्त्रत्रिपुरासुर
शिव अस्त्र-शस्त्र

शिव जी ने पिनाक धनुष से किसका वध किया था

शिव ने पिनाक धनुष से त्रिपुरासुर के तीन अभेद्य उड़नशील नगरों को एक ही बाण से भस्म किया। तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली का अंत हुआ — इसीलिए शिव 'त्रिपुरांतक' हैं।

पिनाकत्रिपुरासुरत्रिपुरांतक
शिव कथा

शिव ने किन असुरों और संकटों का दमन किया?

त्रिपुरासुर, अन्धकासुर, दक्ष, कामदेव, हलाहल विष, दैत्यों-असुरों और जालन्धरवध जैसे प्रसंग शिवकृत दमन में गिनाए गए हैं।

शिवत्रिपुरासुरअन्धकासुर
लोक

भगवान शिव को त्रिपुरारी क्यों कहा गया?

शिव ने तीनों त्रिपुर नगरों को एक बाण से भस्म किया, इसलिए वे त्रिपुरारी कहलाए।

त्रिपुरारीभगवान शिवत्रिपुर दहन
लोक

देवता भगवान शिव की शरण में क्यों गए?

त्रिपुरासुरों के अत्याचार से त्रस्त होकर देवता शिव की शरण में गए।

देवताभगवान शिवत्रिपुरासुर
लोक

त्रिपुरासुरों ने तीनों लोकों में क्या किया?

त्रिपुरासुरों ने तीनों लोकों में हाहाकार मचाया, ऋषियों का संहार किया और देवताओं को स्वर्ग से खदेड़ा।

त्रिपुरासुरतीनों लोकदेवता
लोक

ब्रह्मा जी ने असुरों को अमरता क्यों नहीं दी?

ब्रह्मा जी ने अमरता नहीं दी क्योंकि वह सृष्टि के नियमों के विरुद्ध थी।

ब्रह्माअमरतात्रिपुरासुर
लोक

त्रिपुरासुरों ने ब्रह्मा जी से क्या वरदान माँगा?

त्रिपुरासुरों ने अमरता न मिलने पर तीन अजेय उड़ने वाले नगरों का वरदान माँगा।

त्रिपुरासुरब्रह्मा वरदानतीन नगर
लोक

विद्युन्माली कौन था?

विद्युन्माली तारकासुर का छोटा पुत्र था, जिसके लिए पृथ्वी पर लौह नगर बनाया गया।

विद्युन्मालीत्रिपुरासुरलौह नगर
लोक

कमलाक्ष कौन था?

कमलाक्ष तारकासुर का मँझला पुत्र था, जिसके लिए आकाश में रजत नगर बनाया गया।

कमलाक्षत्रिपुरासुररजत नगर
लोक

तारकाक्ष कौन था?

तारकाक्ष तारकासुर का बड़ा पुत्र था, जिसके लिए मय दानव ने स्वर्ग में स्वर्ण नगर बनाया।

तारकाक्षत्रिपुरासुरतारकासुर पुत्र
लोक

तारकासुर कौन था?

तारकासुर वह असुर था जिसका वध कार्तिकेय ने किया और जिसके पुत्र त्रिपुरासुर कहलाए।

तारकासुरस्कंदकार्तिकेय
लोक

त्रिपुर दहन क्या है?

त्रिपुर दहन में शिव ने त्रिपुरासुरों के तीन नगरों को एक ही बाण से भस्म किया।

त्रिपुर दहनभगवान शिवत्रिपुरासुर
श्लोकों का अर्थ

चन्द्रशेखराष्टकम् में त्रिपुरांतक का क्या अर्थ है?

त्रिपुरांतक का अर्थ है तीनों पुरों (त्रिपुरासुर) को जलाने वाले — यह मन की अस्थिरता के मूल (अहंकार, कर्म, माया) के नाश का प्रतीक है।

त्रिपुरांतकतीन पुरत्रिपुरासुर

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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