विस्तृत उत्तर
शिव जी ने पिनाक धनुष से त्रिपुरासुर — अर्थात तीन असुर-पुत्रों — तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली — का वध किया था।
त्रिपुरासुर की कथा — इन तीनों ने ब्रह्मा की तपस्या करके तीन अभेद्य नगर (पुर) प्राप्त किए थे — सोने का, चाँदी का और लोहे का — जो आकाश में उड़ते रहते थे। उनका वरदान था कि उन्हें केवल एक ही बाण से एक ही क्षण में तीनों नगर एक साथ नष्ट होने पर मारा जा सकता है।
शिव का एक बाण — देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने ब्रह्माण्ड को रथ बनाया, सूर्य-चंद्र को पहिए, मेरु पर्वत को धनुष, विष्णु को बाण। जब तीनों नगर एक रेखा में आए तब शिव ने पिनाक धनुष से एक अग्नि-बाण चलाया और तीनों नगरों को एक साथ भस्म कर दिया। इसी से शिव 'त्रिपुरांतक' कहलाए।




