विस्तृत उत्तर
चन्द्रशेखराष्टकम् के पहले श्लोक में त्रिपुरांतक शिव का वर्णन है:
जिन्होंने रत्नमय मेरु पर्वत को धनुष बनाया, रजत पर्वत (कैलाश) के शिखर पर निवास करते हैं, नागों के स्वामी (वासुकी) को धनुष की प्रत्यंचा बनाया, और अच्युत (विष्णु) को बाण बनाकर, तीनों पुरों (त्रिपुरासुर) को शीघ्र जला दिया; जिन्हें तीनों लोकों के देवता नमस्कार करते हैं — उन चन्द्रशेखर शिव की मैं शरण लेता हूँ। (यदि शिव मेरी रक्षा करते हैं), तब यमराज मेरा क्या कर सकते हैं?




