विस्तृत उत्तर
यमराज सत्यवान के प्राण लौटाने को इसलिए विवश हुए क्योंकि वे अपने ही वचन से बंध गए थे। सावित्री ने तीसरा वरदान माँगा था कि उन्हें सत्यवान से सौ पुत्रों की प्राप्ति हो। यमराज ने बिना सोचे 'तथास्तु' कह दिया। जब उन्हें एहसास हुआ कि एक पतिव्रता स्त्री बिना अपने पति के पुत्रों को जन्म नहीं दे सकती, तो अपने ही वचन से बंधकर उन्हें सत्यवान के प्राण लौटाने पड़े। इस कथा में यमराज का अधिकार धर्म के पालन और एक स्त्री के सतीत्व की शक्ति के सामने विवश हो गया।
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