विस्तृत उत्तर
यमदण्ड भारतीय पौराणिक कथाओं और दर्शन का एक रहस्यमयी और शक्तिशाली शब्द है जिसके अनेक अर्थ और स्वरूप हैं। इसका सबसे प्रचलित स्वरूप मृत्यु के देवता यमराज के हाथ में सुशोभित उनका निजी अस्त्र है जो केवल एक हथियार नहीं बल्कि ब्रह्मांडीय न्याय का प्रतीक है। इसके अतिरिक्त यह महाभारत में अर्जुन को मिले एक दिव्यास्त्र के रूप में भी प्रकट होता है। गरुड़ पुराण में यह मृत्यु के बाद पापी आत्मा को भोगने वाले दण्ड की प्रक्रिया को भी दर्शाता है। जैन कथाओं में यह एक पात्र के नाम के रूप में भी मिलता है। इस प्रकार एक ही शब्द अलग-अलग संदर्भों में न्याय, शक्ति, कर्मफल और चरित्र के गहरे दर्शन को समेटे हुए है।
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