अंतिम संस्कारमृत्यु के बाद गाय दान क्यों करते हैं?गरुड़ पुराण: वैतरणी नदी पार कराने गाय पूँछ पकड़ाती है। गाय = देवमाता (33 कोटि देव)। गो-दान = सबसे बड़ा दान, पाप क्षय। गाय न हो = गौशाला दान/धन दान। भाव प्रधान।#गो दान#मृत्यु#वैतरणी
दिव्यास्त्रघटोत्कच की मृत्यु के समय उसने क्या किया?मृत्यु के अंतिम क्षणों में घटोत्कच ने अपना शरीर विशालकाय कर लिया और गिरते हुए कौरव सेना की एक पूरी अक्षौहिणी को कुचल दिया।#घटोत्कच#मृत्यु#अंतिम क्षण
लोकमृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से क्या होता है?मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से करोड़ों पाप भस्म हो जाते हैं। अजामिल ने 'नारायण' नाम लिया और यमदूतों से बच गया। इसीलिए मृत्यु के समय तुलसी-शालग्राम रखते हैं।#मृत्यु#भगवान नाम#पाप नाश
लोकमृत्यु के बाद स्वर्ग कैसे जाते हैं?पुण्यात्मा के लिए मृत्यु के बाद स्वर्ग का मार्ग सुगम होता है। मृत्यु के समय शालग्राम रखना, तुलसी दल और भगवान का नाम लेना स्वर्ग प्राप्ति में सहायक है।#मृत्यु#स्वर्ग#यात्रा
लोकगरुड़ पुराण के अनुसार भूलोक में किए कर्मों का परलोक से क्या संबंध है?गरुड़ पुराण के अनुसार भूलोक में किए गए कर्म ही परलोक की यात्रा तय करते हैं। पाप से नर्क, पुण्य से स्वर्ग। भोग के बाद पुनः भूलोक में जन्म होता है।#गरुड़ पुराण#भूलोक#कर्म
लोकभूलोक का संबंध मृत्यु के बाद की यात्रा से क्या है?मृत्यु के बाद भूलोक में किए कर्मों के अनुसार स्वर्ग-नरक मिलता है लेकिन वहाँ का भोग पूरा होने पर पुनः भूलोक में ही लौटना पड़ता है। यहीं जन्म-मरण का चक्र तोड़ा जा सकता है।#भूलोक#मृत्यु#परलोक
शिव मंदिरमहाकालेश्वर भस्म आरती में श्मशान भस्म का उपयोग क्यों होता है?प्राचीन: श्मशान भस्म — शिव = श्मशानवासी, मृत्यु विजयी, वैराग्य संदेश। वर्तमान: श्मशान भस्म का उपयोग नहीं — कपिला गाय गोबर + 6 वृक्ष लकड़ी + कपूर-गुगल से तैयार। भस्म प्रकार: श्रौत, स्मार्त, लौकिक।#श्मशान भस्म#महाकालेश्वर#भस्म आरती
लोकयोग साधक मृत्यु के बाद सिद्धलोक में क्यों जाते हैं?जो योग साधक पूर्ण वैराग्य नहीं पा सके वे मृत्यु के बाद अपनी सिद्धियों के फलस्वरूप भुवर्लोक के सर्वोच्च स्तर सिद्धलोक में जन्म लेते हैं।#योग साधक#सिद्धलोक#भुवर्लोक
लोकपुण्यात्मा के लिए भुवर्लोक कैसा होता है?पुण्यात्माओं के लिए भुवर्लोक एक पारदर्शी सुगम मार्ग है। वे इससे होकर आसानी से स्वर्लोक या पितृलोक पहुँच जाते हैं बिना यहाँ फंसे।#भुवर्लोक#पुण्यात्मा#स्वर्लोक
लोकपापी आत्मा मृत्यु के बाद भुवर्लोक में क्यों फंस जाती है?अत्यधिक पाप कर्म, भौतिक आसक्ति या अकाल मृत्यु के कारण आत्मा सीधे स्वर्ग-नरक नहीं जा पाती और प्रेत योनि में निचले भुवर्लोक में फंस जाती है।#भुवर्लोक#पापी आत्मा#मृत्यु
अंतिम संस्कारपंचक में मृत्यु हो तो क्या करें?पंचक मृत्यु=अशुभ(5 और मृत्यु भय)। उपाय: 5 पुतले(कुश/आटा) मृतक साथ दाह, विशेष मंत्र, 5 तिल बत्ते। विद्वान पंडित से करवाएँ। देरी न करें।#पंचक#मृत्यु#उपाय
दिव्यास्त्रयमराज मार्कण्डेय के प्राण लेने क्यों आए थे?मार्कण्डेय की निश्चित आयु 16 वर्ष पूरी होने पर यमराज अपने दूतों के साथ उनके प्राण हरने आए। यह मृत्यु के विधान का पालन था।#यमराज#मार्कण्डेय#प्राण
दिव्यास्त्रयमदण्ड को कालदण्ड क्यों कहते हैं?यमदण्ड को कालदण्ड इसलिए कहते हैं क्योंकि यह 'समय का दण्ड' है — जब किसी का समय पूरा हो जाए तो मृत्यु के विधान से कोई नहीं बचा सकता।#यमदण्ड#कालदण्ड#काल
दिव्यास्त्रयमदण्ड क्या है?यमदण्ड के अनेक अर्थ हैं — यमराज का निजी अस्त्र, अर्जुन को मिला दिव्यास्त्र, मृत्यु के बाद पापी आत्मा का दण्ड, और जैन कथाओं में एक पात्र का नाम।#यमदण्ड#यमराज#कालदण्ड
दिव्यास्त्रगंगाजल मृत्यु के समय क्यों दिया जाता है?गरुड़ पुराण के अनुसार मुख में गंगाजल होने से शरीर और आत्मा पवित्र हो जाते हैं और यमदण्ड नहीं भोगना पड़ता। इसीलिए हिंदू परंपरा में अंतिम समय में गंगाजल देने का विधान है।#गंगाजल#मृत्यु#यमदण्ड
दिव्यास्त्रमृत्यु के समय तुलसी रखने से क्या होता है?मृत्यु के समय सिरहाने तुलसी या मुख में तुलसी पत्ता होने पर यमदूत आत्मा को नहीं ले जाते और स्वयं यमराज भी उस आत्मा को प्रणाम करते हैं।#तुलसी#मृत्यु#यमदूत
अंतिम संस्कारमृत व्यक्ति के मुख में सोना क्यों रखते हैं?सोना = शुद्धतम धातु (अग्नि तत्व)। पंचतत्व शुद्धि, यमलोक यात्रा सहायता, अंतिम दान/पुण्य। मुख में स्वर्ण + गंगाजल + तुलसी। सोना न हो = चांदी/तांबा। सबसे महत्वपूर्ण = ईश्वर स्मरण।#सोना मुख में#मृत्यु#संस्कार
अंतिम संस्कारमृत व्यक्ति को तुलसी के पत्ते क्यों रखते हैं?तुलसी = विष्णु प्रिया (मोक्ष सहायक)। यमदूत/प्रेत तुलसी के पास नहीं आते। गरुड़ पुराण: 4 पवित्र वस्तुओं में तुलसी। मुख में तुलसी+गंगाजल। शरीर पास तुलसी पौधा। वैज्ञानिक: एंटीबैक्टीरियल।#तुलसी#मृत्यु#विष्णु प्रिय
लोकगरुड़ पुराण में प्रेत अवस्था क्या है?मृत्यु के बाद की सूक्ष्म वायवीय अवस्था।#प्रेत अवस्था#गरुड़ पुराण#मृत्यु
श्राद्ध दर्शनप्रेत योनि क्या है?प्रेत योनि = मृत्यु के बाद आत्मा स्थूल शरीर त्यागकर सूक्ष्म शरीर धारण कर जिस अवस्था में जाती है। सपिण्डीकरण संस्कार से पहले आत्मा प्रेत रूप में भटकती है। गरुड़ पुराण के प्रेत कल्प में विस्तृत वर्णन।#प्रेत योनि#गरुड़ पुराण#सूक्ष्म शरीर
लोकधन के प्रति आसक्ति से यक्ष योनि क्यों मिलती है?धन-संचय की तीव्र लालसा और मृत्यु के समय संपत्ति में अटका मन यक्ष या यक्षिणी योनि का कारण बनता है।#धन आसक्ति#यक्ष योनि#खजाना
लोकजल में डूबने से मृत्यु के बाद आत्मा प्रेत क्यों बन सकती है?जल में डूबना अकाल मृत्यु है; शेष आयु और आसक्ति के कारण आत्मा प्रेत रूप में भटक सकती है।#जल में डूबना#अकाल मृत्यु#प्रेत योनि
लोकपापी आत्मा यमदूतों को देखकर क्यों डरती है?पापी आत्मा यमदूतों के विकराल रूप, काल-पाश, त्रिशूल और दंड को देखकर भय से कांप उठती है।#पापी आत्मा#यमदूत#मृत्यु
लोकअंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर क्या होता है?अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर अंगूठे के आकार की वह देह है जिसे यमदूत शरीर से निकालते हैं और जिससे आत्मा यातनाएँ भोगती है।#अंगुष्ठमात्र#सूक्ष्म शरीर#यातना देह
लोकयमदूतों का स्वरूप कैसा बताया गया है?यमदूत विकराल, लाल आँखों वाले, भयानक मुख वाले, काल-पाश, मुद्गर, त्रिशूल और कोड़े धारण किए हुए बताए गए हैं।#यमदूत स्वरूप#गरुड़ पुराण#काल पाश
लोकयमदूत कौन हैं?यमदूत यमराज के दंडाधिकारी हैं, जो मृत्यु के बाद पापी आत्मा को यमलोक तक ले जाते हैं।#यमदूत#यमराज#मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रामृत्यु के बाद घर में अशौच क्यों माना जाता है?अशौच इसलिए माना जाता है ताकि परिजन प्रेत की सद्गति और पारलौकिक देह-निर्माण पर ध्यान दें।#अशौच#घर#मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्राअशौच या सूतक क्या होता है?मृत्यु से सपिण्डीकरण तक घर और परिजनों में रहने वाली अशुद्धि को अशौच या सूतक कहा जाता है।#अशौच#सूतक#मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रामृत्यु के बाद आत्मा अंगूठे के आकार की क्यों कही गई है?प्राण निकलते ही आत्मा अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म स्वरूप धारण करती है, जिसे यमदूत पाश से बाँधते हैं।#अंगुष्ठमात्र आत्मा#मृत्यु#सूक्ष्म शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रायमदूतों को देखकर पापी जीव क्या करता है?यमदूतों को देखकर पापी जीव भय से मल-मूत्र त्याग देता है।#यमदूत#पापी जीव#भय
मरणोपरांत आत्मा यात्राभागवत पुराण में यमदूतों का वर्णन कैसे है?भागवत पुराण में यमदूतों को भयंकर, उग्र दृष्टि वाले और पापी जीव को भयभीत करने वाला बताया गया है।#भागवत पुराण#यमदूत#मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रामृत्यु के समय यमदूत कब आते हैं?जब प्राण कंठ में अवरुद्ध होते हैं, तब पापी जीव के सामने यमदूत आते हैं।#यमदूत#मृत्यु#प्राण
मरणोपरांत आत्मा यात्राप्राण कंठ में रुकने पर क्या होता है?प्राण कंठ में रुकने पर चेतना सिमटती है और पापी जीव को यमदूत दिखाई देते हैं।#प्राणोत्क्रमण#कंठ#यमदूत
मरणोपरांत आत्मा यात्रामृत्यु के समय देह की पवित्रता कैसे रखी जाती है?गोमय-लेपित भूमि, कुशा, तुलसी, शालिग्राम और नौ द्वारों में स्वर्ण से मृत्यु-समय देह की पवित्रता रखी जाती है।#देह पवित्रता#मृत्यु#तुलसी
मरणोपरांत आत्मा यात्रामृत्यु के समय कंठ पर तुलसी पत्र क्यों रखा जाता है?कंठ पर तुलसी पत्र रखना मृत्यु के समय पवित्रता और पारलौकिक शुद्धता की विधि का भाग है।#तुलसी पत्र#कंठ#मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रामृत्यु के समय पापी जीव को वैराग्य क्यों नहीं होता?पापी और विषयासक्त जीव मृत्यु के सामने भी मोह के कारण वैराग्य नहीं पाता।#मृत्यु#पापी जीव#वैराग्य
मरणोपरांत आत्मा यात्राभागवत पुराण में वृद्धावस्था और मृत्यु का क्या वर्णन है?भागवत पुराण में वृद्ध जीव रोगग्रस्त, निर्भर, कुरूप और मृत्यु के सम्मुख होते हुए भी वैराग्यहीन बताया गया है।#भागवत पुराण#वृद्धावस्था#मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रामृत्यु के तुरंत बाद आत्मा को वायुजा देह क्यों मिलती है?मृत्यु के तुरंत बाद पिण्डज शरीर बनने से पहले आत्मा वायुजा देह में वायुमंडल में विचरण करती है।#वायुजा देह#मृत्यु#आत्मा
मरणोपरांत आत्मा यात्रामृत्यु के समय आत्मा स्थूल शरीर कैसे छोड़ती है?आत्मा मृत्यु के समय लिंग शरीर में आवेष्टित होकर स्थूल पञ्चभौतिक शरीर छोड़ती है।#मृत्यु#आत्मा#स्थूल शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रासूक्ष्म शरीर क्या होता है?सूक्ष्म शरीर सत्रह तत्त्वों से बना वह शरीर है जिसमें आत्मा मृत्यु के बाद कर्म-संस्कारों के साथ आगे बढ़ती है।#सूक्ष्म शरीर#लिंग शरीर#मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रास्थूल शरीर क्या होता है?स्थूल शरीर पञ्चभौतिक देह है, जिसे आत्मा मृत्यु के समय छोड़ देती है।#स्थूल शरीर#पञ्चभौतिक देह#मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रामृत्यु को सनातन धर्म में जीवन का अंत क्यों नहीं माना गया है?मृत्यु स्थूल शरीर का अंत है, लेकिन आत्मा लिंग शरीर और अन्य पारलौकिक देहों के साथ आगे यात्रा करती है।#मृत्यु#सनातन धर्म#आत्मा
मरणोपरांत आत्मा यात्राभागवत पुराण में मृत्यु के समय जीव की स्थिति कैसी बताई गई है?भागवत पुराण में पापी जीव मृत्यु के समय वृद्ध, व्याधिग्रस्त, वैराग्यहीन और यमदूतों को देखकर भयभीत बताया गया है।#भागवत पुराण#मृत्यु#मरणासन्न अवस्था
लोकजनलोक में बुढ़ापा, रोग और मृत्यु होती है क्या?नहीं, जनलोक में बुढ़ापा, रोग और मृत्यु का भय नहीं होता।#जनलोक#बुढ़ापा#रोग
लोकगरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के समय श्रीहरि का ध्यान क्यों करना चाहिए?मृत्यु के समय मोह-माया त्यागकर श्रीहरि का ध्यान करने की बात गरुड़ पुराण में कही गई है।#गरुड़ पुराण#मृत्यु#श्रीहरि
लोकसुषुम्ना नाड़ी का सत्यलोक से क्या संबंध है?मृत्यु के समय सगुण उपासक की आत्मा सुषुम्ना नाड़ी (रीढ़ की मध्य नाड़ी) से बाहर निकलती है और देवयान मार्ग से सत्यलोक की यात्रा करती है।#सुषुम्ना#नाड़ी#देवयान
लोकदेवयान मार्ग क्या है?देवयान मार्ग वह दिव्य मार्ग है जिससे आत्मा मृत्यु के बाद अर्चिस, दिन, शुक्ल पक्ष, उत्तरायण के देवताओं के लोकों से होते हुए सत्यलोक पहुँचती है।#देवयान#मार्ग#आत्मा
लोकसत्यलोक में मृत्यु होती है क्या?सत्यलोक में सामान्य मृत्यु नहीं होती — इसे मृत्युंजय लोक कहते हैं। पर महाप्रलय में सत्यलोक भी नष्ट होता है और निवासी वैकुंठ प्रवेश करते हैं।#सत्यलोक#मृत्यु#मृत्युंजय