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विस्तृत उत्तर
जब प्राण कंठ में आकर अवरुद्ध हो जाते हैं, तब जीव की चेतना सिमट जाती है। इसी अवस्था में पापी जीव के सामने यमराज के दूत प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होते हैं। वे भयंकर स्वरूप वाले होते हैं और उनकी आँखें क्रोध तथा उग्रता से भरी होती हैं। उन्हें देखकर मरणासन्न जीव भय से त्रस्त हो जाता है और मल-मूत्र त्याग देता है। इसके बाद प्राणों के शरीर से निकलते ही आत्मा अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म स्वरूप धारण करती है।
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