तर्जनंयमदूतानांरामरामेतिगर्जनम्॥
आपदामपहर्तारंदातारंसर्वसंपदाम्।
भूयोभूयोनमाम्यहम्॥"
साधना: इस श्लोकात्मक मंत्र का प्रतिदिन 21 या 108 बार, 40 दिनों तक जप करने का विधान है। शत्रु बाधा या नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए विशेष प्रयोग के तौर पर, मंत्रोच्चार करते हुए इसे सिर से पैर तक घुमाने की विधि भी बताई गई है।
लाभ: इस मंत्र के जप से भव-बीजों (जन्म-मृत्यु के चक्र) का नाश होता है, सुख-सम्पदा की प्राप्ति होती है, यमदूतों का भय दूर होता है, और सभी प्रकार की आपदाओं का हरण होता है।
अल्पज्ञातता: यह एक प्रभावशाली श्लोकात्मक मंत्र है, जिसकी विशिष्ट साधना विधि और उससे प्राप्त होने वाले गहन आध्यात्मिक लाभ इसे अल्पज्ञात की श्रेणी में रखते हैं।
लाभ: यह अत्यंत सरल और संक्षिप्त मंत्र है, परन्तु इसका फल अत्यंत उच्च बताया गया है – हनुमान जी के साक्षात दर्शन कराने वाला।
अल्पज्ञातता: इसकी सरलता के बावजूद, इसके असाधारण फल के दावे के कारण यह मंत्र गोपनीय और महत्वपूर्ण माना जाता है।
