विस्तृत उत्तर
नित्य प्रलय प्रतिदिन होने वाले जन्मे हुए प्राणियों की मृत्यु और पदार्थों के क्षय को कहते हैं। यह संसार में लगातार चलता रहता है।
नित्य प्रलय क्या है को संदर्भ सहित समझें
नित्य प्रलय क्या है का सबसे सीधा सार यह है: नित्य प्रलय दैनिक मृत्यु और क्षय है।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से क्या होता है?
मृत्यु के समय भगवान का नाम लेने से करोड़ों पाप भस्म हो जाते हैं। अजामिल ने 'नारायण' नाम लिया और यमदूतों से बच गया। इसीलिए मृत्यु के समय तुलसी-शालग्राम रखते हैं।
मृत्यु के बाद स्वर्ग कैसे जाते हैं?
पुण्यात्मा के लिए मृत्यु के बाद स्वर्ग का मार्ग सुगम होता है। मृत्यु के समय शालग्राम रखना, तुलसी दल और भगवान का नाम लेना स्वर्ग प्राप्ति में सहायक है।
गरुड़ पुराण के अनुसार भूलोक में किए कर्मों का परलोक से क्या संबंध है?
गरुड़ पुराण के अनुसार भूलोक में किए गए कर्म ही परलोक की यात्रा तय करते हैं। पाप से नर्क, पुण्य से स्वर्ग। भोग के बाद पुनः भूलोक में जन्म होता है।
भूलोक का संबंध मृत्यु के बाद की यात्रा से क्या है?
मृत्यु के बाद भूलोक में किए कर्मों के अनुसार स्वर्ग-नरक मिलता है लेकिन वहाँ का भोग पूरा होने पर पुनः भूलोक में ही लौटना पड़ता है। यहीं जन्म-मरण का चक्र तोड़ा जा सकता है।
योग साधक मृत्यु के बाद सिद्धलोक में क्यों जाते हैं?
जो योग साधक पूर्ण वैराग्य नहीं पा सके वे मृत्यु के बाद अपनी सिद्धियों के फलस्वरूप भुवर्लोक के सर्वोच्च स्तर सिद्धलोक में जन्म लेते हैं।
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