विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार जब जीव स्थूल शरीर का त्याग करता है तो वह लिंग शरीर (सूक्ष्म देह) में आ जाता है। यदि जीव ने जीवन भर अत्यधिक पाप कर्म किए हैं, भौतिक वस्तुओं के प्रति तीव्र लालसा रखी है, या उसकी अकाल मृत्यु हुई है तो वह जीवात्मा सीधे स्वर्ग या नरक में नहीं जाती। ऐसी आत्मा 'प्रेत' योनि को प्राप्त होकर निचले भुवर्लोक के घने वायुमंडल में ही फंस जाती है। यहाँ उन्हें तीव्र वायु के झोंकों के बीच बिना किसी आश्रय के रहना पड़ता है। ये आत्माएं भूख-प्यास और वासनाओं से पीड़ित रहती हैं क्योंकि सूक्ष्म शरीर में वासना तो होती है परंतु भोगने के लिए स्थूल इंद्रियां नहीं होतीं।
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