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विस्तृत उत्तर
मृत्यु के तुरंत बाद स्थूल शरीर से आत्मा का संबंध टूट जाता है। इस अवस्था में आत्मा तत्काल वायुजा देह धारण करती है। यह वायव्य देह अग्नि रहित शिखा के समान होती है और आत्मा इसी रूप में वायुमंडल में विचरण करती है। क्योंकि उस समय पिण्डदान से पिण्डज शरीर अभी निर्मित नहीं हुआ होता, इसलिए आत्मा कर्म करने में अक्षम रहती है, स्थूल अन्न ग्रहण नहीं कर सकती और अपने घर, शरीर तथा परिजनों के आसपास भटकती रहती है।
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