विस्तृत उत्तर
मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत यमलोक नहीं जाती। विष्णु पुराण और गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के तुरंत बाद आत्मा अपने पूर्व निवास स्थान, अपने शरीर और अपने परिजनों के आसपास भटकती रहती है। वह परिजनों के क्रंदन और विलाप को सुनती है और उनसे संवाद करने का प्रयास करती है, परंतु वायुजा देह के कारण उसका प्रयास सफल नहीं होता। प्रथम दस दिनों में पिण्डदान से उसका पिण्डज शरीर बनता है। बारहवें या तेरहवें दिन सपिण्डीकरण के बाद तेरहवें दिन यमदूत उसे यममार्ग की ओर ले जाते हैं।
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