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विस्तृत उत्तर
मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत यमलोक नहीं जाती। वह वायुजा देह धारण करती है, जो कर्म करने में अक्षम होती है। इस अवस्था में आत्मा बिना किसी आधार के वायुमंडल में विचरण करती है और अपने पूर्व निवास स्थान, अपने शरीर और अपने परिजनों के आसपास रहती है। वह परिजनों के क्रंदन और विलाप को सुनती है और उनसे संवाद करने का प्रयास करती है, पर वायुजा देह के कारण उसका कोई प्रयास सफल नहीं होता। पिण्डदान से पिण्डज शरीर बनने तक यह अवस्था रहती है।
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