विस्तृत उत्तर
महादान आत्मा की पारलौकिक यात्रा में सीधे सहायक बताए गए हैं। गोदान आत्मा को वैतरणी नदी पार कराने में मदद करता है; गोदान होने पर आत्मा को नौका मिलती है, और गोदान न होने पर उसे रक्त और मवाद से भरी नदी में कष्टपूर्वक तैरना पड़ता है। तिल दान प्रेत के पापों का नाश करता है और असुरों तथा दानवों को दूर रखता है। लवण और लौह दान यमराज को प्रसन्न करते हैं। कपास दान भूतों और पिशाचों के खतरे को टालता है। स्वर्ण और धान्य दान परलोक में सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। भूमि दान नरक की यातनाओं से पूर्ण रक्षा करता है। यदि व्यक्ति स्वस्थ अवस्था में स्वयं दान करे तो फल 1000 गुना, रुग्ण अवस्था में 100 गुना और मृत्यु के बाद पुत्र द्वारा दान करने पर सामान्य प्रभाव बताया गया है।
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