विस्तृत उत्तर
श्राद्ध का अन्न आत्मा तक नाम, गोत्र और श्रद्धापूर्वक उच्चारित मंत्रों के माध्यम से पहुँचता है। भगवान विष्णु ने गरुड़ को बताया कि जीव अपने पूर्व कर्मों के अनुसार देवता, मनुष्य, पशु या किसी अन्य योनि में हो सकता है। श्राद्ध का अन्न उसे उसकी नई योनि के अनुसार उसी रूप में परिवर्तित होकर प्राप्त होता है। ब्राह्मणों द्वारा उच्चारित नाम और गोत्र उस आहुति को एक वाहक की तरह उस विशिष्ट आत्मा तक पहुँचाते हैं। श्रद्धा से जपे गए मंत्र इस पारलौकिक अंतरण का माध्यम हैं।
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