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विस्तृत उत्तर
यदि आत्मा गंधर्व योनि में है, तो श्राद्ध अन्न भोग-विलास की वस्तु बन जाता है। श्राद्ध का अन्न आत्मा की नई योनि के अनुसार रूपांतरित होकर प्राप्त होता है। इसलिए देव योनि में वह अमृत बनता है, और गंधर्व योनि में भोग-विलास की वस्तु बन जाता है।
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