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विस्तृत उत्तर
यदि आत्मा नाग योनि में है, तो श्राद्ध अन्न वायु बन जाता है। श्राद्ध का अन्न आत्मा की नई योनि के अनुसार उसी रूप में परिवर्तित होकर प्राप्त होता है। यह पारलौकिक अंतरण नाम, गोत्र और श्रद्धा से जपे गए मंत्रों के माध्यम से होता है।
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