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विस्तृत उत्तर
यातना देह में आत्मा को यममार्ग और नरक के कष्टों का अनुभव होता है। यह देह अग्नि में जलने, कटने या फटने पर असीम पीड़ा अनुभव करती है, पर नष्ट नहीं होती। यममार्ग में आत्मा का शरीर कौवों, कुत्तों आदि द्वारा खाया जाता है, फाड़ा जाता है और भेदा जाता है। मार्ग तपते सूर्य की ज्वालाओं से दग्ध होता है, वहाँ विश्राम के लिए वृक्ष या छाया नहीं होती, और आत्मा भूख, प्यास और थकान से पीड़ित होकर यमराज के दरबार की ओर घसीटी जाती है।
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