📖
विस्तृत उत्तर
श्राद्ध अन्न आत्मा की नई योनि के अनुसार रूपांतरित होकर उसे प्राप्त होता है। यदि आत्मा देव योनि में है, तो वह अमृत बनता है। गंधर्व योनि में भोग-विलास की वस्तु, पशु योनि में घास, नाग योनि में वायु, पक्षी योनि में फल, दानव योनि में मांस, प्रेत योनि में रक्त और मनुष्य योनि में अन्न बन जाता है। ब्राह्मणों द्वारा उच्चारित नाम और गोत्र उस आहुति को संबंधित आत्मा तक पहुँचाते हैं और मंत्र इस पारलौकिक अंतरण का माध्यम होते हैं।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





