विस्तृत उत्तर
श्राद्ध विधान पर संदेह नहीं करना चाहिए क्योंकि भगवान विष्णु ने स्वयं गरुड़ के संशय का निवारण करते हुए बताया कि श्राद्ध का अन्न आत्मा तक उसकी नई योनि के अनुसार रूपांतरित होकर पहुँचता है। ब्राह्मणों द्वारा उच्चारित नाम और गोत्र आहुति को उस विशिष्ट आत्मा तक वाहक की तरह पहुँचाते हैं। श्रद्धा से जपे गए मंत्र इस पारलौकिक अंतरण का माध्यम हैं। भगवान विष्णु ने स्पष्ट किया कि इस वैज्ञानिक और तात्त्विक विधान पर तनिक भी संदेह नहीं करना चाहिए।
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