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विस्तृत उत्तर
यदि आत्मा देव योनि में है, तो श्राद्ध अन्न अमृत बन जाता है। भगवान विष्णु ने बताया कि जीव अपने पूर्व कर्मों के अनुसार किसी भी योनि में हो सकता है, और श्राद्ध का अन्न उसे उसकी नई योनि के अनुसार उसी रूप में परिवर्तित होकर प्राप्त होता है। देव योनि में वह अन्न अमृत रूप में मिलता है।
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