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विस्तृत उत्तर
श्राद्ध में नाम और गोत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे आहुति को उस विशिष्ट आत्मा तक पहुँचाने वाले वाहक की तरह कार्य करते हैं। ब्राह्मणों द्वारा उच्चारित नाम और गोत्र श्राद्ध अन्न को संबंधित आत्मा तक पहुँचाते हैं। श्रद्धापूर्वक जपे गए मंत्र इस पारलौकिक अंतरण का माध्यम हैं। आत्मा चाहे देव योनि में हो, गंधर्व, पशु, नाग, पक्षी, दानव, प्रेत या मनुष्य योनि में हो, श्राद्ध अन्न उसे उसकी स्थिति के अनुसार रूपांतरित होकर प्राप्त होता है।
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