लोकस्वर्लोक को और किस नाम से जानते हैं?स्वर्लोक को स्वर्ग, देवलोक, त्रिदिव, स्वः (व्याहृति में), ज्योतिर्लोक और देवपुर जैसे अनेक नामों से जाना जाता है।#स्वर्लोक#नाम#स्वर्ग
दिव्यास्त्रपर्वतास्त्र नाम का क्या अर्थ है?'पर्वत' और 'अस्त्र' के मेल से बना यह नाम 'पर्वतों का हथियार' का अर्थ देता है। यह नाम ही इस अस्त्र की भयावह शक्ति का परिचय दे देता है।#पर्वतास्त्र#नाम#अर्थ
लोकभुवर्लोक को 'अंतरिक्ष' क्यों कहते हैं?भुवर्लोक को अंतरिक्ष इसलिए कहते हैं क्योंकि यह वहाँ तक फैला है जहाँ तक वायु बहती है और बादल दिखते हैं। यह भौतिक और दैवीय जगत के बीच का मध्यवर्ती आकाशीय क्षेत्र है।#भुवर्लोक#अंतरिक्ष#नाम
दिव्यास्त्रअंतर्धान अस्त्र को कुबेर अस्त्र क्यों कहते हैं?जब कुबेर ने अर्जुन को अपना परम प्रिय अस्त्र — अंतर्धान अस्त्र — दिया, तब से इसे कुबेर अस्त्र भी कहा जाने लगा।#अंतर्धान अस्त्र#कुबेर अस्त्र#कुबेर
दिव्यास्त्रसुदर्शन चक्र को और किस नाम से जानते हैं?सुदर्शन चक्र को 'विष्णु चक्र' भी कहते हैं। यह कालचक्र और ब्रह्मांडीय व्यवस्था पर नियंत्रण का प्रतीक भी है।#सुदर्शन चक्र#नाम#कालचक्र
दिव्यास्त्रहनुमान का नाम हनुमान कैसे पड़ा?इंद्र के वज्र प्रहार से बाल हनुमान की ठोड़ी (हनु) टूट गई थी, इसी कारण उनका नाम हनुमान पड़ा।#हनुमान#नाम#हनु
माला नियमराम नाम जप के लिए कौन सी माला सबसे उत्तम है?तुलसी माला सर्वोत्तम (राम=विष्णु, तुलसी=विष्णुप्रिया)। रुद्राक्ष/स्फटिक/चंदन भी। 'श्री राम जय राम' / 'ॐ रामाय नमः'। राम नाम = सर्वसरलतम — माला बिना भी।#राम#नाम#माला
श्रीमद्भागवतगोकर्ण नाम क्यों रखा गया?गाय से उत्पन्न उस बालक के कान गाय जैसे थे, इसलिए आत्मदेव ने उसका नाम गोकर्ण रखा।#गोकर्ण#नाम#गाय
प्रतिपदा श्राद्धप्रतिपदा श्राद्ध को और किस नाम से जानते हैं?प्रतिपदा श्राद्ध को 'पड़वा श्राद्ध' भी कहते हैं। दोनों नाम पर्यायवाची हैं। यह आश्विन कृष्ण प्रतिपदा (पितृ पक्ष का पहला दिन) को किया जाने वाला श्राद्ध है।#प्रतिपदा श्राद्ध#पड़वा श्राद्ध#नाम
लोकतर्पण में गोत्र और नाम क्यों बोला जाता है?गोत्र और नाम पितर की पहचान या पता हैं; इनके द्वारा वसु-रुद्र-आदित्य तर्पण को सही आत्मा तक पहुँचाते हैं।#तर्पण#गोत्र#नाम
मरणोपरांत आत्मा यात्राश्राद्ध में नाम और गोत्र का क्या महत्व है?नाम और गोत्र श्राद्ध अन्न को सही आत्मा तक पहुँचाने वाले वाहक हैं।#श्राद्ध#नाम#गोत्र
लोकसत्यलोक को ब्रह्मलोक क्यों कहते हैं?सत्यलोक को ब्रह्मलोक इसलिए कहते हैं क्योंकि यह भगवान ब्रह्मा का निवास स्थान है। यहीं से ब्रह्मांड का संचालन और वेदों का ज्ञान प्रवाहित होता है।#सत्यलोक#ब्रह्मलोक#ब्रह्मा
रामचरितमानस — बालकाण्डपार्वतीजी ने 'अपर्णा' नाम कैसे पाया?'अपर्णा' = अ (बिना) + पर्णा (पत्ते) = पत्तों के बिना रहने वाली। जब पार्वतीजी ने तपस्या में सूखे पत्ते खाना भी छोड़ दिया, तब उनका नाम 'अपर्णा' पड़ा। चौपाई — 'पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नामु तब भयउ अपरना॥'#बालकाण्ड#अपर्णा#पार्वती
ज्योतिष दोष एवं उपाय27 नक्षत्रों के नाम और स्वामी ग्रह27 नक्षत्र = 9 ग्रह × 3 each। अश्विनी(केतु), रोहिणी(चंद्र), पुष्य(शनि), मघा(केतु), हस्त(चंद्र), स्वाति(राहु), मूल(केतु), श्रवण(चंद्र), रेवती(बुध)। क्रम: केतु→शुक्र→सूर्य→चंद्र→मंगल→राहु→गुरु→शनि→बुध।#27 नक्षत्र#नाम#स्वामी
ज्योतिष दोष एवं उपायकालसर्प दोष कितने प्रकार12 प्रकार (राहु-केतु भाव): अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर, शेषनाग। प्रत्येक=भिन्न प्रभाव। नवीन अवधारणा।#कालसर्प#प्रकार#12
हिंदू दर्शन18 पुराणों के नाम क्या हैं18 महापुराण: विष्णु, भागवत, नारद, गरुड़, पद्म, वराह (सात्विक); ब्रह्मांड, ब्रह्मवैवर्त, मार्कण्डेय, भविष्य, वामन, ब्रह्म (राजसिक); शिव, लिंग, स्कंद, अग्नि, मत्स्य, कूर्म (तामसिक)। कुल ~4 लाख श्लोक। स्कंद पुराण सबसे बड़ा (81,100 श्लोक)।#18 पुराण#महापुराण#व्यास
संस्कार विधिनामकरण संस्कार में नाम रखने के शास्त्रीय नियम क्या हैं?नामकरण नियम: जन्म नक्षत्र अक्षर, ब्राह्मण=शर्मा/क्षत्रिय=वर्मा/वैश्य=गुप्त (मनुस्मृति), सम अक्षर (2,4) शुभ, देवता/शुभ अर्थ, सरल उच्चारण, गोपनीय+लौकिक दो नाम। पिता कान में बोले → शहद से 'ॐ' लिखें।#नामकरण#संस्कार#नाम
देवी नामकाली के 108 नाम क्या हैं?काली के 108 नाम प्रमुख: काली, महाकाली, कपालिनी, कालरात्रि, चामुंडा, चंडिका, भद्रकाली, भैरवी, महामाया, श्यामा, दिगंबरा, श्मशानवासिनी, दक्षिणकालिका, आद्याशक्ति, जगदंबा। प्रत्येक नाम 'ॐ [नाम] नमः' से जपें।#काली 108 नाम#अष्टोत्तर#कालिका
देवी ज्ञाननवदुर्गा के नाम क्या हैं?नवदुर्गा के नाम (देवी कवच): 1. शैलपुत्री 2. ब्रह्मचारिणी 3. चंद्रघंटा 4. कूष्मांडा 5. स्कंदमाता 6. कात्यायनी 7. कालरात्रि 8. महागौरी 9. सिद्धिदात्री। नवरात्रि के नौ दिन क्रमशः इन नौ देवियों की पूजा होती है।#नवदुर्गा#9 देवी#नाम
देवी ज्ञाननवदुर्गा के नाम क्या हैं?नवदुर्गा के नाम हैं — 1.शैलपुत्री, 2.ब्रह्मचारिणी, 3.चंद्रघंटा, 4.कूष्मांडा, 5.स्कंदमाता, 6.कात्यायनी, 7.कालरात्रि, 8.महागौरी, 9.सिद्धिदात्री। नवरात्रि के नौ दिन इनकी क्रमशः पूजा की जाती है।#नवदुर्गा#नाम#नौ रूप
दशमहाविद्यादस महाविद्याओं के नाम और उनकी साधना का क्रम क्या है?10 नाम: काली→तारा→षोडशी→भुवनेश्वरी→छिन्नमस्ता→भैरवी→धूमावती→बगलामुखी→मातंगी→कमला। काली कुल: काली/तारा/भुवनेश्वरी/छिन्नमस्ता। श्री कुल: शेष 6। उग्र/सौम्य/सौम्य-उग्र 3 श्रेणी।#दस महाविद्या#नाम#क्रम
मंत्र विधिअखंड नाम संकीर्तन और अखंड जप में क्या अंतर है?संकीर्तन: सामूहिक, सस्वर गायन, संगीत, बहिर्मुखी, भक्ति प्रसार। जप: व्यक्तिगत, मौन/उपांशु, माला, अंतर्मुखी, मंत्र सिद्धि। चैतन्य: संकीर्तन श्रेष्ठ। योग: जप श्रेष्ठ। दोनों सत्य — मार्ग भिन्न, लक्ष्य एक।#संकीर्तन#अखंड जप#भजन
शिव रूपशिव के रुद्र रूप के ग्यारह अवतारों के नाम क्या हैं?शिव पुराण (शतरुद्र संहिता 18.27): कपाली, पिंगल, भीम, विरूपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, आपिर्बुध्य, शम्भू, चण्ड, भव। भागवत: मन्यु, मनु, महिनस, महान्, शिव, ऋतध्वज, उग्ररेता, भव, काल, वामदेव, धृतव्रत। सुरभी पुत्र — देवकार्य हेतु।#एकादश रुद्र#ग्यारह#अवतार