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हिंदू दर्शन📜 मत्स्य पुराण (53.12-14), विष्णु पुराण, देवीभागवत2 मिनट पठन

18 पुराणों के नाम क्या हैं

संक्षिप्त उत्तर

18 महापुराण: विष्णु, भागवत, नारद, गरुड़, पद्म, वराह (सात्विक); ब्रह्मांड, ब्रह्मवैवर्त, मार्कण्डेय, भविष्य, वामन, ब्रह्म (राजसिक); शिव, लिंग, स्कंद, अग्नि, मत्स्य, कूर्म (तामसिक)। कुल ~4 लाख श्लोक। स्कंद पुराण सबसे बड़ा (81,100 श्लोक)।

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विस्तृत उत्तर

18 महापुराणों की रचना वेदव्यास (कृष्णद्वैपायन व्यास) को समर्पित है। इनमें कुल मिलाकर लगभग 4 लाख श्लोक हैं। मत्स्य पुराण (53.12-14) में 18 पुराणों के नाम और उनके श्लोक संख्या का उल्लेख है।

18 महापुराण (तीन वर्गों में)

सात्विक पुराण (विष्णु प्रधान — 6)

  1. 1विष्णु पुराण — 23,000 श्लोक — विष्णु माहात्म्य, सृष्टि, राजवंश
  2. 2भागवत पुराण — 18,000 श्लोक — कृष्ण लीला, भक्ति
  3. 3नारद पुराण — 25,000 श्लोक — भक्ति, व्रत-तीर्थ
  4. 4गरुड़ पुराण — 19,000 श्लोक — मृत्यु, प्रेतकल्प, अंत्येष्टि
  5. 5पद्म पुराण — 55,000 श्लोक — सृष्टि, तीर्थ, विष्णु माहात्म्य
  6. 6वराह पुराण — 24,000 श्लोक — वराह अवतार, व्रत-दान

राजसिक पुराण (ब्रह्मा प्रधान — 6)

  1. 1ब्रह्मांड पुराण — 12,000 श्लोक — ब्रह्मांड वर्णन, ललिता सहस्रनाम
  2. 2ब्रह्मवैवर्त पुराण — 18,000 श्लोक — कृष्ण-राधा, प्रकृति
  3. 3मार्कण्डेय पुराण — 9,000 श्लोक — दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य)
  4. 4भविष्य पुराण — 28,000 श्लोक — भविष्य की घटनाएं, व्रत
  5. 5वामन पुराण — 10,000 श्लोक — वामन अवतार
  6. 6ब्रह्म पुराण — 10,000 श्लोक — सृष्टि, तीर्थ, सूर्य

तामसिक पुराण (शिव प्रधान — 6)

  1. 1शिव पुराण — 24,000 श्लोक — शिव माहात्म्य, लिंग पूजा
  2. 2लिंग पुराण — 11,000 श्लोक — लिंगोत्पत्ति, शिव 28 अवतार
  3. 3स्कंद पुराण — 81,100 श्लोक — सबसे बड़ा पुराण, तीर्थ माहात्म्य
  4. 4अग्नि पुराण — 15,400 श्लोक — विश्वकोश जैसा — धनुर्विद्या, व्याकरण, ज्योतिष
  5. 5मत्स्य पुराण — 14,000 श्लोक — मत्स्य अवतार, मंदिर निर्माण
  6. 6कूर्म पुराण — 17,000 श्लोक — कूर्म अवतार, लक्ष्मी

याद रखने का श्लोक

मद्वयं भद्वयं चैव ब्रत्रयं वचतुष्टयम्। अनापलिंगकूस्कानि पुराणानि पृथक् पृथक्।।

(म-2, भ-2, ब्र-3, व-4, अ-ना-प-लिं-कू-स्कं)

ध्यान दें: सात्विक/राजसिक/तामसिक वर्गीकरण पद्म पुराण (उत्तर खंड 236.18-21) में मिलता है। सभी विद्वान इस वर्गीकरण से सहमत नहीं हैं — कई मानते हैं यह बाद का प्रक्षेप है।

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शास्त्रीय स्रोत
मत्स्य पुराण (53.12-14), विष्णु पुराण, देवीभागवत
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