विस्तृत उत्तर
सत्यलोक को 'ब्रह्मलोक' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह साक्षात भगवान ब्रह्मा का निज धाम है। ब्रह्मा जी त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में से एक, इस सम्पूर्ण भौतिक सृष्टि के प्रथम जीव (आदि-पुरुष) एवं प्रजापति हैं और वे इसी लोक में निवास करते हैं। इसी कारण इसे सत्यलोक और ब्रह्मलोक दोनों नामों से जाना जाता है। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का संचालन, वेदों का ज्ञान, यज्ञों के विधान और सृष्टि के सनातन नियम इसी लोक से प्रवाहित होते हैं। परंतु यहाँ एक महत्वपूर्ण भेद है — श्रीमद्भागवत पुराण में शुकदेव गोस्वामी स्पष्ट करते हैं कि कभी-कभी 'ब्रह्मलोक' शब्द का प्रयोग शाश्वत वैकुण्ठ के लिए भी किया जाता है। श्रील जीव गोस्वामी और अन्य वैष्णव आचार्यों ने स्पष्ट किया है कि 'ब्रह्मलोकः सनातनः' का तात्पर्य उस सनातन वैकुण्ठ से है जो सत्यलोक के पार स्थित है। इस प्रकार सत्यलोक (भौतिक ब्रह्मांड में) और शाश्वत ब्रह्मलोक (वैकुंठ) अलग हैं।
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