विस्तृत उत्तर
गोकर्ण नाम का कारण स्पष्ट बताया गया है। धुंधुली द्वारा फल गाय को खिलाने के बाद तीन महीने में गाय ने एक मनुष्याकार बालक को जन्म दिया। वह बालक सुंदर, दिव्य, निर्मल और सुवर्ण-कांति वाला था। आत्मदेव ने उसे देखकर आनंदपूर्वक उसके संस्कार किए। नगर के लोग भी इस अद्भुत जन्म को देखने आए और आश्चर्य करते रहे कि गाय से ऐसा दिव्य बालक उत्पन्न हुआ। दैवयोग से किसी को पूरा रहस्य पता नहीं चला। आत्मदेव ने जब देखा कि उस बालक के कान गाय जैसे हैं, तब उन्होंने उसका नाम गोकर्ण रखा। नाम में गाय से उत्पत्ति और कानों की विशेषता दोनों संकेतित हैं।
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