विस्तृत उत्तर
कृष्ण की द्वारका इतनी सुंदर इसलिए थी क्योंकि उसमें सुरक्षा, समृद्धि और मंगलमय सजावट तीनों साथ दिखाई देते हैं। द्वारकापुरी मधु, भोज, दशार्ह, अर्ह, कुकुर, अंधक और वृष्णि वंश के शक्तिशाली यादवों से सुरक्षित थी। नगर समस्त ऋतुओं के वैभव से संपन्न था। वहाँ पवित्र वृक्षों और लताओं के कुंज, फलों से भरे उद्यान, पुष्प-वाटिकाएं, क्रीड़ावन और कमलों से भरे सरोवर थे। कृष्ण के स्वागत के लिए फाटक, महल-द्वार और सड़कों पर बंदनवार लगाए गए थे। ध्वजाएं और पताकाएं फहरा रही थीं। राजमार्ग, बाजार और चौक साफ करके सुगंधित जल से सींचे गए थे। घरों के द्वार दही, अक्षत, फल, ईख, जलभरे कलश, धूप और दीप से सजाए गए थे।
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