विस्तृत उत्तर
भीष्म को मृत्यु के समय कृष्ण दर्शन कृष्ण की भक्तवत्सल कृपा के कारण मिले। भीष्म ने कृष्ण को सर्वात्मा, समदर्शी, अद्वितीय, अहंकाररहित और निष्पाप परमात्मा कहा। वे यह भी कहते हैं कि कृष्ण में ऊँचे-नीचे कर्मों के कारण कोई विषमता नहीं होती। फिर भी वे युधिष्ठिर से कहते हैं कि देखो, भगवान अपने अनन्य प्रेमी भक्तों पर कितनी कृपा करते हैं; जब वे प्राण त्यागने जा रहे हैं, तब कृष्ण स्वयं उन्हें दर्शन देने आए हैं। भीष्म ने कृष्ण से प्रार्थना की कि वे प्रसन्न मुख, अरुण कमल जैसे नेत्र और चतुर्भुज रूप में उनके सामने रहें, जब तक वे शरीर न छोड़ दें। इसलिए यह दर्शन भीष्म की भक्ति और कृष्ण की कृपा से जुड़ा है।
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