विस्तृत उत्तर
कुंती स्तुति में कृष्ण-दर्शन को जन्म-मृत्यु से छूटने का कारण बताया गया है। कुंती कहती है कि जीवन में पद-पद पर विपत्तियाँ आती रहें, क्योंकि विपत्तियों में कृष्ण का दर्शन होता है। फिर वह कहती है कि कृष्ण का दर्शन हो जाने पर जन्म-मृत्यु के चक्कर में नहीं आना पड़ता। आगे वही भाव श्रवण और स्मरण से जोड़ा गया है: जो भक्त कृष्ण के चरित्र का बार-बार श्रवण, गान, कीर्तन और स्मरण करते हैं, वे शीघ्र ही कृष्ण के चरणकमल का दर्शन करते हैं। उस चरणकमल के लिए कहा गया है कि वह जन्म-मृत्यु के प्रवाह को सदैव के लिए रोक देता है। इसलिए यहाँ मुक्ति का मार्ग कृष्ण-स्मरण, कृष्ण-दर्शन और भक्ति से जुड़ा है।
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