विस्तृत उत्तर
भीष्म पितामह का अंतिम संस्कार युधिष्ठिर ने कराया। भीष्म कृष्ण में मन लगाकर प्राण त्याग चुके थे। उनके प्राण शांत होने पर सब मौन हो गए, देवता और मनुष्य वाद्य बजाने लगे, राजाओं ने उनकी प्रशंसा की और आकाश से पुष्प-वर्षा हुई। इसके बाद युधिष्ठिर ने उनके मृत शरीर की अंतिम क्रिया कराई। यह कार्य धर्म और श्रद्धा के साथ किया गया। युधिष्ठिर स्वयं भी कुछ समय के लिए शोक में डूब गए। इस प्रकार भीष्म के प्रति पांडवों का सम्मान केवल प्रणाम या उपदेश लेने तक सीमित नहीं रहा; उनके प्राणत्याग के बाद भी युधिष्ठिर ने पितामह के योग्य अंतिम संस्कार कराया और शोक व्यक्त किया।
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