विस्तृत उत्तर
भीष्म पितामह के प्राण त्यागने पर वहाँ उपस्थित सब लोग मौन हो गए। भीष्म ने मन, वाणी और दृष्टि की वृत्तियों से अपने को श्रीकृष्ण में लीन किया और उनके प्राण शांत हो गए। उन्हें अनंत ब्रह्म में लीन जानकर सब वैसे ही चुप हो गए जैसे दिन बीतने पर पक्षियों का कलरव शांत हो जाता है। उसी समय देवता और मनुष्य वाद्य बजाने लगे। साधु स्वभाव के राजा भीष्म की प्रशंसा करने लगे और आकाश से फूलों की वर्षा हुई। यह दृश्य केवल शोक का नहीं था; उसमें भीष्म के उच्च प्राणत्याग, कृष्ण-स्मरण, योग और भक्ति के प्रति आदर का भाव था। उनकी मृत्यु को दिव्य मौन, स्तुति और पुष्प-वर्षा से चिह्नित किया गया।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





