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देवता प्रश्नोत्तरी — 79 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित देवता विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 79 प्रश्न

मंत्र साधना

गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों के 24 देवता

गायत्री मंत्र के 24 अक्षर 24 अलग-अलग देवताओं (जैसे अग्नि, सूर्य, विष्णु, शिव, सरस्वती) का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके जप से शरीर की 24 ग्रंथियां और इन सभी देवताओं की शक्तियां जाग्रत होती हैं।

गायत्री मंत्र24 अक्षरदेवता
मंदिर ज्ञान

मंदिर में परिक्रमा कितनी बार करनी चाहिए?

देवी=1, विष्णु=4, गणेश/हनुमान=3, शिव=आधी (सोमसूत्र)। पीपल=11/21। विषम शुभ। शिव: जलप्रणालिका न लांघें → आधी।

परिक्रमाकितनीसंख्या
लोक

शिशुमार चक्र के विभिन्न अंगों में कौन-कौन से देवता और नक्षत्र हैं?

शिशुमार चक्र में ध्रुव (पूंछ), सप्तर्षि (कूल्हे), आकाशगंगा (पेट), नारायण (हृदय), मंगल (मुख), शनि (जननांग), बृहस्पति (गर्दन), चंद्र (मन) और बुध (श्वास) में हैं।

शिशुमार चक्रदेवतानक्षत्र
लोक

सुधर्मा सभा में कौन-कौन होते हैं?

सुधर्मा सभा में इन्द्र-शची के अलावा सिद्ध, साध्य, महर्षि पराशर, दुर्वासा, याज्ञवल्क्य, व्यासदेव, बृहस्पति, शुक्राचार्य और तुम्बुरु जैसे महान जन उपस्थित रहते हैं।

सुधर्मासदस्यऋषि
लोक

स्वर्ग में कौन-कौन रहता है?

स्वर्ग में 33 कोटि देवता, गंधर्व, अप्सराएं, सिद्ध, चारण, विद्याधर, महर्षि और पुण्यकर्मी मनुष्य रहते हैं।

स्वर्गनिवासीदेवता
मंत्र विधि

मंत्र जप में ऋष्यादि न्यास का क्या अर्थ है?

'ऋषि-छन्द-देवता न्यास बिना जप = तुच्छ फल।' 7 अंग: ऋषि (शिर), छन्द (मुख), देवता (हृदय), बीज (गुह्य), शक्ति (चरण), कीलक (नाभि), विनियोग (अंजलि)। उदाहरण: नवार्ण — ब्रह्मविष्णुरुद्र ऋषि, गायत्री छन्द, महाकाली-लक्ष्मी-सरस्वती देवता। नाम जप/चालीसा में अनिवार्य नहीं।

ऋष्यादि न्यासऋषिछन्द
लोक

देवता भारत में जन्म लेने की इच्छा क्यों करते हैं?

देवता स्वर्ग में भी भारत में जन्म लेना चाहते हैं क्योंकि केवल यहाँ मोक्ष संभव है। विष्णु पुराण में 'गायन्ति देवाः' श्लोक में यही कहा गया है।

देवताभारतवर्षजन्म
तंत्र हवन

तंत्र में हवन सामग्री किस मंत्र साधना के लिए अलग होती है?

शिव: बेलपत्र/धतूरा। देवी: लाल चंदन/कमलगट्टे/केसर। लक्ष्मी: कमलगट्टे/केसर। गणेश: मोदक/दूर्वा। विष्णु: तुलसी। काली: गुड़। सर्वसाधारण: घी+तिल+जौ+आम समिधा।

हवनसामग्रीअलग
दिव्यास्त्र

आग्नेयास्त्र किस देवता का अस्त्र है

आग्नेयास्त्र अग्निदेव का अस्त्र है। इसका प्रतिकार वारुणास्त्र (वरुणदेव का जल-अस्त्र) था। महाभारत के लगभग सभी प्रमुख योद्धाओं के पास यह अस्त्र था।

आग्नेयास्त्रअग्निदेवदेवता
माला नियम

स्फटिक माला से जप कैसे करें और किस देवता के लिए?

देवी/लक्ष्मी सर्वोत्तम। सर्वदेवता मान्य (निष्पक्ष)। गंगाजल+दूध शुद्धि। शुक्रवार/नवरात्रि। स्वच्छ रखें। शुरुआती साधकों हेतु उत्तम।

स्फटिकमालाजप
घर मंदिर

घर के मंदिर में किन देवताओं की मूर्ति नहीं रखनी चाहिए?

विवादास्पद। कुछ: नटराज (तांडव/संहार), रौद्र शिव, बड़ी (>9 इंच), खंडित = बचें। शुभ: बालकृष्ण, लक्ष्मी-गणेश, शांत शिव, राधा-कृष्ण। अनेक: 'सभी शुभ, भाव > रूप।'

मूर्तिनहींरखनी
लोक

अग्निहोत्र की आहुति देवताओं तक कैसे पहुँचती है?

यज्ञ की आहुति का सूक्ष्म तत्व वायु देव के माध्यम से भुवर्लोक से होकर स्वर्लोक के देवताओं तक पहुँचता है। भुवर्लोक भूलोक और स्वर्लोक के बीच ब्रह्मांडीय संचार मार्ग है।

अग्निहोत्रआहुतिभुवर्लोक
लोक

यज्ञ का भुवर्लोक से क्या संबंध है?

यज्ञ की आहुति का सूक्ष्म तत्व भुवर्लोक से होकर देवताओं तक स्वर्लोक में पहुँचता है। भुवर्लोक यज्ञीय ऊर्जाओं और मन्त्रों का ब्रह्मांडीय संवाहक है।

यज्ञभुवर्लोकआहुति
मंत्र जप ज्ञान

गुरु मंत्र और इष्ट मंत्र में क्या अंतर होता है?

गुरु मंत्र: दीक्षा में प्राप्त, अत्यंत गोपनीय, गुरु+मंत्र शक्ति, मोक्ष। इष्ट: स्वयं चुना/गुरु निर्धारित, कम गोपनीय, कामना+भक्ति। गुरु मंत्र > इष्ट (शक्ति)।

गुरु मंत्रइष्ट मंत्रअंतर
माला नियम

एक ही माला से अलग-अलग मंत्रों का जप कर सकते हैं या नहीं?

आदर्श: अलग माला (ऊर्जा मिश्रण)। व्यावहारिक: स्फटिक = सर्वदेवता। अनुष्ठान = अलग अनिवार्य। शिव=रुद्राक्ष, विष्णु=तुलसी, देवी=स्फटिक/हल्दी।

एक मालाअलगमंत्र
ध्यान अनुभव

ध्यान में दिव्य सुगंध आने पर किस देवता की कृपा मानें?

चंदन=शिव/विष्णु, कमल/गुलाब=लक्ष्मी/देवी, तुलसी=कृष्ण, कपूर=शिव, केसर=देवी। बिना स्रोत=दिव्य! शुभ=देवता उपस्थिति। कृतज्ञता+ध्यान जारी।

दिव्यसुगंधदेवता
श्रीमद्भागवत

भीष्म पितामह के प्राण त्यागने पर क्या हुआ?

भीष्म के प्राण त्यागने पर सब मौन हो गए, देवता और मनुष्य वाद्य बजाने लगे, राजाओं ने प्रशंसा की और आकाश से फूल बरसे।

भीष्म प्राण त्यागकृष्णदेवता
शिवभक्ति

मुनियों का बल और सौभाग्य किससे बताया गया है?

मुनियों का बल और सौभाग्य शिवभक्ति के कारण बताया गया है।

मुनिबलसौभाग्य
शिवभक्ति

ब्रह्मा, विष्णु और देवताओं को उत्तम पद कैसे मिला?

ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र और अन्य देवता शिवभक्ति से ही उत्तम पद को प्राप्त हुए।

ब्रह्माविष्णुइन्द्र
पाशुपत योग

पशु किसे कहा गया है?

देवता से लेकर पिशाच तक सभी प्राणी पशु कहे गए हैं।

पशुदेवतापिशाच
माहेश्वर योग

नन्दी ने यह योग किनकी उपस्थिति में बताया था?

नन्दी ने यह योग देवताओं, ऋषियों और पितरों की सन्निधि में सनत्कुमार को बताया था।

नन्दीदेवताऋषि
सर्ग

ऊर्ध्वस्रोत सृष्टि क्या है?

ऊर्ध्वस्रोत सृष्टि सात्त्विक रूप कही गई है और देवताओं की सृष्टि से जुड़ी है।

ऊर्ध्वस्रोतदेवसर्गदेवता
देव काल

देवताओं का एक वर्ष कितना होता है?

मनुष्यों के तीन सौ साठ वर्ष देवताओं के एक वर्ष के बराबर बताए गए हैं।

देवतादेव वर्षमनुष्य वर्ष
देव काल

देवताओं का एक महीना कितना होता है?

मनुष्यों के तीस वर्ष का काल देवताओं के एक महीने के बराबर बताया गया है।

देवतादेव मासमनुष्य वर्ष

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।