विस्तृत उत्तर
देवता स्वर्ग में बैठकर भी इस भारत भूमि पर जन्म लेने की लालसा करते हैं और इसका स्तुतिगान करते हैं। विष्णु पुराण का यह प्रसिद्ध श्लोक इस सत्य का उद्घोष करता है — 'गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे। स्वर्गापवर्गास्पदहेतुभूते भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात्॥' अर्थात देवगण निरंतर यही गान करते हैं कि जिन्होंने स्वर्ग और अपवर्ग (मोक्ष) के मार्ग स्वरूप भारतवर्ष में जन्म लिया है वे पुरुष हम देवताओं से भी अधिक धन्य और बड़भागी हैं। देवगण कहते हैं कि हमारे स्वर्ग-प्रद कर्मों (पुण्यों) का क्षय होने पर न जाने हम कहाँ जन्म लेंगे किंतु वे मनुष्य धन्य हैं जो भारत भूमि में उत्पन्न होकर निष्काम कर्म करते हुए साक्षात् श्री हरि में लीन होने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
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