विस्तृत उत्तर
आग्नेयास्त्र भगवान अग्निदेव (अग्नि) का दिव्यास्त्र है।
आग्नेय' का अर्थ — 'अग्नि' = अग्निदेव, 'आग्नेय' = अग्नि से संबंधित। इसलिए 'आग्नेयास्त्र' = अग्निदेव का अस्त्र।
अग्निदेव — अग्नि देवताओं में प्रमुख देव हैं जो यज्ञ, जीवन और शक्ति के प्रतीक हैं। वेदों में अग्नि को सर्वाधिक महत्व दिया गया है। उनके अस्त्र का उपयोग जलाने और नष्ट करने के लिए था।
प्रतिकार — जिस प्रकार प्रत्येक दिव्यास्त्र का प्रतिकार उसके विपरीत तत्व का अस्त्र है, उसी प्रकार आग्नेयास्त्र का प्रतिकार 'वारुणास्त्र' (वरुण देव का जल-अस्त्र) था। जल अग्नि को बुझाता है।
अन्य तत्व-अस्त्र — इसी प्रकार वायव्यास्त्र (वायु-देव का), पर्जन्यास्त्र (वर्षा का), वारुणास्त्र (जल का) आदि तत्व-विशिष्ट अस्त्र थे।
व्यापक उपलब्धता — आग्नेयास्त्र प्राचीन युद्ध में सर्वाधिक प्रचलित दिव्यास्त्रों में था क्योंकि अग्नि सार्वभौमिक और भयंकर शक्ति का प्रतीक है।





