विस्तृत उत्तर
स्वर्लोक यद्यपि देवराज इन्द्र के शासन के अधीन है परंतु यहाँ ब्रह्मांड के कई उच्च कोटि के जीव निवास करते हैं। पहली श्रेणी में 33 कोटि (प्रकार) के मुख्य देवता हैं जिनमें 12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र और 2 अश्विनी कुमार शामिल हैं। इसके अतिरिक्त अग्नि, वायु, वरुण, यम, कुबेर आदि अष्ट-दिक्पाल भी यहाँ अपनी-अपनी स्वर्ण राजधानियों में निवास करते हैं। दूसरी श्रेणी में गंधर्व और अप्सराएं हैं जो स्वर्ग के संगीतकार और नर्तक हैं। तीसरी श्रेणी में सिद्ध, चारण और विद्याधर हैं। चौथी श्रेणी में महर्षि और देवर्षि हैं। पाँचवीं श्रेणी में वे पुण्यात्मा मनुष्य हैं जिन्होंने पृथ्वी पर धर्म का पालन किया, दान दिए और यज्ञ किए। स्वर्लोक में उन्हें उनके कर्मों के अनुरूप दिव्य शरीर प्राप्त होता है जिससे वे भूख, प्यास और बुढ़ापे से मुक्त होकर जीवन व्यतीत करते हैं।
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