विस्तृत उत्तर
महाभारत के सभा पर्व में नारद जी ने सुधर्मा सभा के सदस्यों का विस्तृत वर्णन किया है। इस राजसभा में सिद्ध, साध्य, मरुद्गण और देवर्षि अपने तेजोमयी स्वरूप में उपस्थित होते हैं। यहाँ वे ब्रह्मर्षि और राजर्षि निरंतर आते-जाते रहते हैं जो साक्षात ब्रह्मा जी के समान प्रभावशाली हैं। प्रमुख ऋषियों में महर्षि पराशर, पर्वत मुनि, गालव, महर्षि दुर्वासा, याज्ञवल्क्य, उद्दालक, श्वेतकेतु, व्यासदेव, राजा हरिश्चन्द्र, विश्वकर्मा और गंधर्व तुम्बुरु शामिल हैं। देवताओं के गुरु बृहस्पति और असुरों के गुरु शुक्राचार्य भी इस सभा में नित्य विराजमान रहते हैं जो अपने चंद्रमा के समान चमकीले विमानों द्वारा यहाँ उपस्थित होते हैं। भृगु और सप्तर्षि भी इस सभा की शोभा बढ़ाते हैं।
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