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ऋषि प्रश्नोत्तरी — 23 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित ऋषि विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 23 प्रश्न

लोक

ब्रह्माण्ड पुराण में महर्लोक के मन्वन्तर संबंध का वर्णन कैसे है?

ब्रह्माण्ड पुराण के अनुसार प्रत्येक मन्वन्तर के बाद सेवानिवृत्त इन्द्र, मनु और सप्तर्षि महर्लोक में आते हैं। उनका तेज ब्रह्मा के समान होता है और वे पाँच आध्यात्मिक ऐश्वर्यों से युक्त होते हैं।

ब्रह्माण्ड पुराणमहर्लोकमन्वन्तर
लोक

महर्लोक में कौन-कौन से ऋषि रहते हैं?

महर्लोक में महर्षि भृगु, मार्कण्डेय मुनि, भृगु वंश के ऋषि, सिद्ध योगी, नैष्ठिक ब्रह्मचारी और मन्वन्तर के सेवानिवृत्त ऋषि रहते हैं।

महर्लोकऋषिभृगु
लोक

इन्द्र की सुधर्मा सभा में कौन से ऋषि आते हैं?

सुधर्मा सभा में महर्षि पराशर, दुर्वासा, याज्ञवल्क्य, व्यासदेव, हरिश्चन्द्र, विश्वकर्मा, तुम्बुरु, बृहस्पति, शुक्राचार्य और भृगु-सप्तर्षि आते हैं।

सुधर्माऋषिनारद
लोक

सुधर्मा सभा में कौन-कौन होते हैं?

सुधर्मा सभा में इन्द्र-शची के अलावा सिद्ध, साध्य, महर्षि पराशर, दुर्वासा, याज्ञवल्क्य, व्यासदेव, बृहस्पति, शुक्राचार्य और तुम्बुरु जैसे महान जन उपस्थित रहते हैं।

सुधर्मासदस्यऋषि
मंत्र विधि

मंत्र जप में ऋष्यादि न्यास का क्या अर्थ है?

'ऋषि-छन्द-देवता न्यास बिना जप = तुच्छ फल।' 7 अंग: ऋषि (शिर), छन्द (मुख), देवता (हृदय), बीज (गुह्य), शक्ति (चरण), कीलक (नाभि), विनियोग (अंजलि)। उदाहरण: नवार्ण — ब्रह्मविष्णुरुद्र ऋषि, गायत्री छन्द, महाकाली-लक्ष्मी-सरस्वती देवता। नाम जप/चालीसा में अनिवार्य नहीं।

ऋष्यादि न्यासऋषिछन्द
वेद ज्ञान

वेद किसने लिखे?

वेद अपौरुषेय हैं — किसी ने रचे नहीं। ऋषि मंत्रद्रष्टा थे, रचयिता नहीं। परमात्मा के निःश्वास से प्रकट। शतपथ ब्राह्मण: अग्नि, वायु, आदित्य, अंगिरा ने तपस्या से प्राप्त किए। महर्षि व्यास ने चार भागों में संकलित किया — वे संपादक हैं, रचयिता नहीं।

वेदअपौरुषेयव्यास
शिव मंत्र

शिव मंत्र जप में विनियोग का क्या अर्थ है और कैसे करें?

विनियोग = मंत्र का परिचय (6 अंग: ऋषि, छन्द, देवता, बीज, शक्ति, कीलक)। जप पूर्व जल हाथ में लेकर बोलें। महामृत्युंजय: वशिष्ठ ऋषि, अनुष्टुप, त्र्यंबक, ॐ, ह्रीं, क्लीं। सरल: 'ॐ नमः शिवाय' 3 बार = विनियोग विकल्प।

विनियोगअर्थविधि
माहेश्वर योग

नन्दी ने यह योग किनकी उपस्थिति में बताया था?

नन्दी ने यह योग देवताओं, ऋषियों और पितरों की सन्निधि में सनत्कुमार को बताया था।

नन्दीदेवताऋषि
माहेश्वर योग

ऋषियों ने सूतजी से माहेश्वर योग के बारे में क्या पूछा?

ऋषियों ने शिवकृपा से होने वाले विशिष्ट ज्ञान, योग और योगमार्ग से अनुग्रह का वर्णन पूछा।

ऋषिसूतजीमाहेश्वर योग
श्रीमद्भागवत

सूतजी से ऋषियों ने क्या पूछा?

ऋषियों ने सूतजी से शास्त्रों का सार, कलियुग के जीवों का कल्याण, कृष्ण अवतार, हरि कथा और धर्म का आश्रय पूछा।

सूतजीऋषिप्रश्न
श्रीमद्भागवत

नैमिषारण्य में ऋषि क्यों इकट्ठे हुए थे?

शौनकादि ऋषि नैमिषारण्य में भगवत प्राप्ति की इच्छा से हजार वर्ष में पूर्ण होने वाला महान यज्ञ कर रहे थे।

नैमिषारण्यऋषियज्ञ
पुराण कथा

ऋषियों ने सूतजी से क्या सुनना चाहा?

ऋषियों ने सूतजी से लिङ्गमाहात्म्ययुक्त पुण्यदायिनी पुराणसंहिता सुनना चाहा।

ऋषिसूतजीपुराणसंहिता
पुराण कथा

नैमिषारण्य क्या है?

नैमिषारण्य वह तीर्थ है जहाँ ऋषि रहते थे और जहाँ नारदजी तथा सूतजी पहुँचे।

नैमिषारण्यऋषिनारद
लोक

यमपुरी का पूर्व द्वार किन योगियों के लिए है?

पूर्व द्वार सिद्ध योगियों, ऋषियों, ज्ञानियों और संबुद्ध आत्माओं के लिए है, जिनका पुष्पवर्षा से स्वागत होता है।

यमपुरी पूर्व द्वारयोगीऋषि
लोक

त्रिपुरासुरों ने तीनों लोकों में क्या किया?

त्रिपुरासुरों ने तीनों लोकों में हाहाकार मचाया, ऋषियों का संहार किया और देवताओं को स्वर्ग से खदेड़ा।

त्रिपुरासुरतीनों लोकदेवता
लोक

जनलोक में भृगु आदि ऋषि भी रहते हैं क्या?

हाँ, जनलोक में भृगु जैसे महान प्रजापति और प्रलय के समय महर्लोक के ऋषि आश्रय लेते हैं।

जनलोकभृगुऋषि
लोक

जनलोक में आध्यात्मिक ज्ञान कैसे सुरक्षित रहता है?

जनलोक प्रलय से सुरक्षित रहता है और वहाँ सिद्ध ऋषि आध्यात्मिक ज्ञान को सुरक्षित रखते हैं।

जनलोकआध्यात्मिक ज्ञानप्रलय
लोक

जनलोक में कौन रहते हैं?

जनलोक में ब्रह्मा जी के मानस पुत्र सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार रहते हैं।

जनलोकसनकादिसनक
महामृत्युंजय मंत्र परिचय

महामृत्युंजय मंत्र के रचयिता कौन हैं?

महामृत्युंजय मंत्र को महर्षि वशिष्ठ द्वारा दृष्ट (रचित) माना जाता है — यह ऋग्वेद के सातवें मंडल (७.५९.१२) का श्लोक है जो ऋषियों के गहन समाधि और ध्यान में उद्घाटित हुआ।

महर्षि वशिष्ठऋग्वेद सातवां मंडलदृष्ट मंत्र
धर्मशास्त्र एवं संस्कार

गोत्र क्या है महत्व क्या है

गोत्र उस प्राचीन ऋषि का नाम है जिनसे हमारी पितृ वंश-परंपरा जुड़ी है। यह वंश-पहचान, संकल्प-विधान, विवाह-निर्धारण और पितृ-तर्पण में अनिवार्य है। मुख्य सात गोत्र सप्तर्षियों के नाम पर हैं।

गोत्रवंशऋषि
वेद ज्ञान

वेदों में तपस्या का महत्व क्या है?

वेदों में तपस्या को सृष्टि का आदि-कारण माना गया है (ऋग्वेद 10/129)। अथर्ववेद (11/5/1) में ब्रह्मचर्य-तप से देवताओं ने मृत्यु पर विजय पाई। तैत्तिरीय उपनिषद (3/1) — 'तपो ब्रह्म' — तप ही ब्रह्म है।

तपस्यावेदतप
वेद ज्ञान

वेदों में ऋषियों का क्या स्थान है?

वेदों में ऋषि मंत्रों के द्रष्टा (मंत्रद्रष्टा) हैं — रचयिता नहीं। निरुक्त (2/11) कहता है — 'ऋषयो मन्त्रद्रष्टारः।' विश्वामित्र, वशिष्ठ, अत्रि, भरद्वाज आदि सप्तर्षि वैदिक ज्ञान को मनुष्य-लोक तक ले आए।

ऋषिवेदद्रष्टा
मंत्र जप विधि

मंत्र जप में विनियोग क्या है और कैसे करें?

मंत्र परिचय: 6 अंग (ऋषि/छन्द/देवता/बीज/शक्ति/कीलक)। हाथ में जल → 'अस्य श्री... ऋषिः, छन्दः, देवता...' → जल छोड़ें। गायत्री: विश्वामित्र/गायत्री/सविता। सरल: 'ॐ' 3 बार।

विनियोगजपविधि

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।